Monday, October 10, 2011

श्रद्धांजलि


शांत सुबह मे मन को सुकून देने वाली
मस्त शामों मे दिल को झूमा देने वाली
उदासी के पलों मे अक्सर संबल देने वाली
वो आवाज़ क्या कभी थम सकती है?
नहीं !
वो आवाज़ गूंज रही है अब भी
वो आवाज़ गूँजती रहेगी हमेशा
हर फिजाँ मे इसी तरह । 
---------यशवन्त माथुर

गजल सम्राट जगजीत सिंह जी को हार्दिक श्रद्धांजलि